शहला राशिद: सरकार को वीरता पुरूस्कार देना था तो नजीब की माँ और बेला भाटिया को देते

नई दिल्ली: 68वें गणतंत्र दिवस के मौके पर देश की कई बहादुर महिलाओं को उनकी बहादुरी के लिए वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया। लेकिन इस गणतंत्र दिवस पर कई ऐसी महिलाओं की बहादुरी को नज़रअंदाज़ कर दिया गया, जिनकी बहादुरी और पराक्रम का डंका पूरे देश में बजा।

जेएनयू छात्र संघ की पूर्व उपाध्यक्ष और आईसा कार्यकर्ता शहला राशिद ने वीरता पुरस्कार के आवंटन पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जो महिलाएं आज इस सम्मान की सच में हकदार हैं, उनको यह सम्मान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि अगर आज कोई इस पुरस्कार की सच में हकदार हैं तो वह रोहित वेमुला की माता राधिका वेमुला हैं, जो अपने अधिकार की जंग इस सिस्टम से बिना डरे लड़ रहीं हैं। देश में दलितों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ लड़ाई में राधिका वेमुला ने अहम भूमिका निभाई है।

शहला ने कहा कि इस पुरस्कार की हकदार नजीब की मां फातिमा नफीस हैं, जो अपने बेटे के साथ हुई नाइंसाफी के खिलाफ आज सरकार और प्रशासन से लोहा ले रही हैं। शहला ने कहा कि सरकार को वीरता पुरस्कार से समाजिक कार्यकर्ता बेला भाटिया को सम्मानित करना चाहिए था। जो कि बस्तर के आदिवासियों के बीच मानवधिकार के लिए अपनी जान की परवाह किए बग़ैर काम कर रही हैं। शहला ने इस लिस्ट में समाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह का नाम भी लिया।