क्या आप जानते हैं फांसी की सज़ा सुनाने के बाद पेन की निब क्यों तोड़ देता है जज…

देश में सुप्रीम कोर्ट द्वारा यदि किसी को फांसी की सजा दी भी जाती हैलेकिन जज जब भी किसी दोषी को फांसी की सजा देते हैं तो कोर्ट रूम छोड़ने से पहले उस पेन की निब तोड़ देते हैं, जिससे उन्होंने सजा का फैसला लिखा। दरअसल पेन की निब तोड़ना आज भी एक अबूझ और अद्भुत पहेली है, जिसे कोई नहीं सुलझा पाया है।

पेन की निब तोड़ने से जुड़े रहस्य के जवाब:

1.पेन की निब तोड़ना एक सिम्बॉलिक एक्ट है, ऐसा इसलिए होता है क्योंकि किसी व्यक्ति के जीवन के फैसले को जिस पेन से लिख दिया जाता है, उस पेन का दुबारा कभी फिर से प्रयोग न हो।

2.पेन की निब इसलिए भी तोड़ दी जाती है क्योंकि ऐसी उम्मीद की जाती है कि कोई भी व्यक्ति इस तरह के जघन्य अपराध न करे। हमारे कानून में फांसी की सज़ा सबसे बड़ी सज़ा होती है, क्योंकि इससे व्यक्ति का जीवन समाप्त हो जाता है।

3.कानून के तौर पर फांसी की सजा किसी भी जघन्य अपराध के मुकदमों के लिए समझौते का अंतिम एक्शन होता है, जिसे किसी भी अन्य प्रक्रिया द्वारा बदला नहीं जा सकता। जब फैसले में पेन से “Death” लिख दिया जाता है, तो इसी क्रम में पेन की निब को तोड़ दिया जाता है, ताकि इंसान के साथ-साथ पेन की भी मौत हो जाए।

4.ये भी माना जाता है कि शायद फैसले से अपने आप को अलग रखने या फैसले को लेकर होने वाले अपराधबोध को लेकर जज पेन की निब तोड़ देते हैं। एक बार फैसला लिख दिए जाने और निब तोड़ दिए जाने के बाद खुद जज को भी यह यह अधिकार नहीं होता कि उस जजमेंट की समीक्षा कर सके या उस फैसले को बदल सके या पुनर्विचार की कोशिश कर सके।

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