“ऐ-अल्लाह” जब तू अपनी रहमतो के दरवाजे खोले और पुकारे…”है कोई रहमत मांगने वाला?

बेशक़ इंसान बच सकता है

1-तकब्बुर से……सलाम के जरिये

2-मुसीबत से ……सदक़े के जरिये

3-बीमारी से …….दुआ के जरिये

4-लालच से ……..शुक़्र के जरिये

5-ग़ुस्से से ……….सब्र के जरिये

6-दोजख़ से ……..इबादत के जरिये

7-जाहिल से ……..ख़ामोशी के जरिये

8-शैतान से ………इल्म के जरिये

9-गुनाह से…………अल्लाह के खौफ के जरिये

“ए-अल्लाह” जब तू अपनी रहमतो के दरवाजे खोले और पुकारे…”है कोई रहमत मांगने वाला?

है कोई खुशिया मांगने वाला?

है कोई शिफा मांगने वाला?

है कोई मेरे “महबूब” (सल्ललाहो अलैही वसल्लम)” की चाहत मांगने वाला?

तो मेरी दुआ है की, “या अल्लाह” सारी खुशियाँ सारी रहमतंे सारी कामयाबीयां सारी बर्क्तें सारी नेअ़मतें “नबी – ए – पाक” ( सल्ललाहो अलैही वसल्लम )” की चाहत उस शख्स को दे दे. जो ये मेसेज पढ़ के दुसरे को भी इस खूबसूरत दुआ में शामिल करे…

*आमीन*

दाग तेरे दामन के धुले ना धुले !!!!

नेकिया तेरी तराजू में तुले न तुले !!!!!

आज ही गुनाहों से कर ले तोबा !!

ख़ुदा जाने कल तेरी आँख खुले ना खुले !!

“अस्तगफिरुल्लाह रब्बी मिन कुल्ली ज़न्बिउ व अतुबू इलैही”

आज आप यह मेसेज अगर किसी 1 को भी शेयर क रदें तो आप सोच भी नही सकते कितने लोग “अल्लाह” से तौबा कर लेंगे.
इंशा अल्लाह —

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