एक बार फिर आडवाणी का सपना रह गया अधूरा…..देश को मिल सकती हैं एक महिला राष्ट्रपति

देश के सियासी माहौल में फिलहाल पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव का तड़का लग रहा है। लेकिन जल्द ही राष्ट्रपति पद के चुनाव को लेकर भी सियासी दांव पेंच शुरू हो सकते हैं। बता दें कि देश के अगले राष्ट्रपति का चुनाव अगले साल जुलाई में होना है। लेकिन अभी से कयासों का दौर जारी है।
अभी तक ये अनुमान लगाया जा रहा था कि वरिष्ठ बीजेपी नेता लाल कृष्ण आडवाणी को बीजेपी राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बना सकती है। लेकिन लगता है कि आडवाणी का सपना एक बार फिर से अधूरा रह जाएगा। देश को एक बार फिर से एक महिला राष्ट्रपति मिल सकती है। सूत्रों के मुताबिक बीजेपी की इस कद्दावर महिला नेता को RSS का पूरा समर्थन हासिल है। लिहाजा ये माना जा रहा है कि अगली राष्ट्रपति यही होंगी। हैरान होने से पहले हम आपको बता देते हैं कि किसके नाम की चर्चा राष्ट्रपति पद के लिए सबसे ज्यादा हो रही है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज जिनका हाल ही में किडनी का ऑपरेशन हुआ है वो राष्ट्रपति पद के लिए तगड़ी दावेदार मानी जा रही हैं। RSS विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का नाम राष्ट्रपति पद के लिए आगे बढ़ा रहा है। राष्ट्रपति के लिए दावेदार के मामले में एक ट्विस्ट ये है कि बीजेपी का ही एक खेमा लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन को राष्ट्रपति के तौर पर प्रोजेक्ट कर रहा है। सुषमा स्वराज का पक्ष इसलिए ज्यादा मजबूत लग रहा है क्योंकि RSS के दो बड़े नेता भैयाजी जोशी और दत्तात्रेय होसबोले सुषमा का समर्थन कर रहे हैं। इसके साथ ही संघ प्रमुख मोहन भागवत की स्वीकृति तो है ही। यही कारण है कि ये तय माना जा रहा है कि सुषमा स्वराज ही देश की अगली राष्ट्रपति होंगी।
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के साथ साथ राष्ट्रपति बनने की रेस में लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन का नाम भी शामिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के साथ सुमित्रा के काफी अच्छे संबंध हैं। फिलहाल मौजूदा गणित को समझे तो सुषमा से बेहतर उम्मीदवार राष्ट्रपति पद के लिए कोई नहीं हो सकता है। अपने दम पर एनडीए राष्ट्रपति नहीं बनवा सकता है। इसलिए ऐसे उम्मीदवार का चयन करना होगा जिस पर सभी राजनीतिक दल सहमत हो जाएं। विपक्षी दलोों में भी सुषमा स्वराज की स्वीकार्यता है। राष्ट्रपति पद के चुनाव में पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों की अहम भूमिका रहेगी। अगर इन चुनावों में बीजेपी अच्छा प्रदर्शन करती है तो वो राष्ट्रपति पद के चुनाव में हावी रहेगी। बता दें कि राष्ट्रपति पद का चुनाव सांसदों और विधायकों के वोट से होता है। जीत के लिए जरूरी से एनडीए फिलहाल पौने दो लाख वोट से पीछे है। एनडीए के पास करीब 457342 मत हैं।
अगर उत्तर प्रदेश, पंजाब, समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अच्छा प्रदर्शन किया तो राष्ट्रपति पद के चुनाव में एनडीए को आसानी हो सकती है। यही कारण है कि अभी से ऐसे उम्मीदवार के नाम पर मंथन चल रहा है जो सर्व स्वीकार्य हो। RSS के अलावा विपक्षी दल भी सुषमा को लेकर सकारात्मक हैं। इसके अलावा हाल ही में सुषमा का किडनी का ऑपरेशन हुआ है। ऐसे में राष्ट्रपति का पद उनके लिए सबसे सही रहेगा। फिलहाल जो हालात हैं उनको देखते हुए सुषमा की दावेदारी मजबूत नजर आ रही है। आडवाणी भी सुषमा का विरोध नहीं कर सकते हैं। सुषमा को आडवाणी के खेमे का ही माना जाता है। कुल मिलाकर राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए जो अंक गणित है उसके खांचे में सुषमा स्वराज पूरी तरह से फिट बैठती हैं। अगर कोई गोपनीय बदलाव नहीं हुआ तो सुषमा का राष्ट्रपति बनना तय माना जा रहा है। एक बार फिर से राष्ट्रपति की कुर्सी पर एक महिला बैठ सकती है।

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