उस वक़्त क्या होगा जब इंसान की सबसे बड़ी अदालत में पेशी होगी…शेयर ज़रूर करें

इस्लाम धर्म में इस बात को विस्तार से समझाते हुए कहा गया है कि क़यामत आएगी और सभी लोग मर जाएंगे। उसके बाद सारी ज़मीन को एक मैदान का रूप देकर जितने लोग भी दुनिया में पैदा हुए उन सबको एक साथ ज़िन्दा करके उस मैदान में जमा किया जाएगा और एक एक व्यक्ति का हिसाब होगा।

हर व्यक्ति को उसके छोटे से छोटे और बड़े से बड़े गुनाह को उसकी आँखों से दिखा दिया जाएगा ताकि वह फ़ैसले से सन्तुष्ट हो सके क्योंकि उस अदालत में सारे जजों का जज फैसला करेगा और न तो वह पूर्वाग्रह से ग्रसित होगा और न ही कुछ ख़ास लोगों के विवेक (conscience) या चाहत को सन्तुष्ट करना उसका मक़सद होगा। उसको न तो इस बात का डर होगा कि फ़ैसले के ख़िलाफ़ गुण्डे और मवालियों के हंगामे से क़ानून और व्यवस्था ख़राब हो जाएगी और न ही अपराधी के छोटे या बड़े होने से सज़ा कोई अन्तर पड़ेगा

क्या अजब नज़ारा होगा कि, अपराधी को केवल अपराधी की नज़र से देखा जाएगा चाहे दुनिया में वह………

जानबूझ कर गलत फ़ैसला देने वाला किसी सर्वोच्च न्यायालय का जज ही क्यों न रहा हो। या

बेगुनाहों पर अत्याचार करने के लिए अपनी फ़ौज का गलत इस्तेमाल करने वाला कोई जनरल ही क्यों न रहा हो। या

जनता की सेवा करने का वादा करके जनता को बलवाइयों के हवाले करने वाला कोई शासक ही क्यों न रहा हो। या

साम्प्रदायिकता के बीज बो कर देश का वातावरण दूषित करने वाला कोई राजनेता ही क्यों न रहा हो। या

क़ौम का सौदा करके ज़ालिमों का साथ देने वाला कोई मौक़ा परास्त धर्म गुरु ही क्यों न रहा हो।

(शरीफ खान एक फेसबुक यूजर हैं, यह लेख उन्ही की तिमिलिने से लिया गया है)