इस देश में राष्ट्रपति के कहने पर लोग बिना कपड़ो के काम करने लगे….

हुआ यूं कि बेलारूस के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर ल्यूकाशेनको नई तकनीक पर भाषण दे रहे थे, कि उनकी जुबान फिसल गई. भाषण के दौरान उन्होंने कहा- “Innovations, IT-technologies, privatisation – it is all clear. We’ve conquered all of them. But everything is very simply, one should get undressed and work.”(नवीनीकरण, आईटी प्रौद्योगिकी, निजीकरण- हमने इन सभी पर विजय प्राप्त की है. लेकिन सब कुछ बहुत सरल है, व्यक्ति को निर्वस्त्र होकर काम पर जाना चाहिए).

राष्ट्रपति असल में कहना चाह रहे थे ‘develop themselves’ यानि खुद का विकास करो, लेकिन ये शब्द रशियन भाषा में ‘get undressed’ के काफी करीब था, इसलिए शायद वो गड़बड़ा गए. लेकिन राष्ट्रपति के ये शब्द तो जैसे पत्थर की लकीर हो गए. लोगों ने राष्ट्रपति की फिसली जबान को इगनोर करने के बजाए इसे बेहद सीरियसली लिया. बहुतों ने इसे freudian slip भी कहा (अवचेतन मन की भावनाओं को प्रकट करने वाली भूल).

कई लोगों ने इस मामले को और तूल देने के लिए अपने ऑफिस में निर्वस्त्र और अर्धनग्न होकर तस्वीरें लीं और #getnakedandgotowork नाम के हैशटैग के साथ लोकल सोशल मीडिया पर शेयर कीं. न सिर्फ पुरुष बल्कि महिलाओं ने भी इस काम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया. कोरोबारी हों या फिर संगीतकार, दुकान में काम करने वाली महिला हों या फिर शारीरिक श्रम करने वाली, टैटू आर्टिस्ट हो या फिर कुल्हाड़ी से लकड़ी काटने वाला लकड़हारा, सभी ने निर्वस्त्र होकर अपने-अपने काम की तस्वीरें शेयर कीं. इतना ही नहीं पत्रकार और रेडियो जॉकी भी इस फ्लैशमॉब में शामिल थे. देखते ही देखते ये हैशटैग वायरल हो गया.

साफ देखा जा सकता है कि यहां राष्ट्रपति की एक जरा सी भूल को किस तरह तूल दिया गया. मजाक बनाने की नियत से उठाया गया ये कदम न सिर्फ राष्ट्रपति के पद का अपमान है बल्कि उस देश के लोगों की मानसिकता का भी परिचय देता है, जिन्होंने राषट्रपति के शब्दों को नग्नता फैलाने के लिए इस्तेमाल किया. वो बेलारूस है, वहां नग्नता आम हो सकती है लेकिन फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन की बात हो तो इस हमाम में सभी नंगे हैं, चाहे बेलारूस हो या फिर भारत.