आखिर क्यों इस्लामिक क़ानून और महिलाओ के पर्दे पर सवालिया निशान लगाए जाते हैं???

मुस्लिम देश जो कानून का पूरी तरह से पालन करते है जहाँ इस्लामिक लॉ के अनुसार लोगो को अपराध की सज़ा दी जाती है और दूसरे मुद्दों पर भी इस्लामिक लॉ को फॉलो किया जाता है हलाकि जब इस्लामिक कानून पर बहस की बात आती है तो सेक्युलर समुदाय इस्लीमिक कानून को गलत ठहराने के महिलाओ के अधिकारों के मुद्दे सामने रखते है

अभी हाल ही में महिलाओ से जुड़ी खबर सऊदी अरब में सामने आई है इसलिए गौरफिक्र के लायक है खबर में ये दावा किया गया था कि यहाँ एक व्यक्ति को इसलिये जेल भेज गया क्योकि उसने महिलाओ के अधिकारों का सर्थन किया था और पर्दो के खिलाफ आवाज़ उठाई थी. सबसे पहले बात निकाह की जब इस्लाम धर्म में किसी लड़का और लड़की की शादी होती है तो लड़के वाले बारात लेकर लड़की वालो के घर जाते है जहाँ निकाह के लिए मोलवी साहब पहले लड़की से बात करते है लड़की की रज़ामंदी के बाद मोलवी साहब लड़के की और बढ़ते है अगर लड़की इंकार कर दे तो लड़के की शादी नही हो सकती